आपका जीवन लक्ष्य आपका वर्ग तय करता है! -मंजुल भारद्वाज

कुदरत अलग अलग मनुष्य को अलग अलग गुण और योग्यता से नवाज़ती है. यह गुण और योग्यता जीवन जीने के उद्देश्य से फलीभूत होते हैं. जिसका जो लक्ष्य उसके वो गुण और योग्यता दुनिया के सामने आते हैं. 
जिसके जीवन का लक्ष्य मात्र पेट भरना है वो दुनिया में भीख मांगते हैं या दूसरों पर आश्रित होते हैं इनको भिखारी या परजीवी कहा जाता है. 
जिनके जीवन का लक्ष्य पेट भरना होता है पर उनको अपने श्रम पर भरोसा होता है वो अपने श्रम से अपना और अपने परिवार का पेट भरते हैं.सदा श्रम करने वाले,संघर्ष करने वाले,दुनिया के यह सबसे ज्यादा अभाव वाले मनुष्य होते हैं. इनको गरीब और मजदूर कहा जाता है.
यह हमेशा अपना जीवन अभाव में जीते हैं.इनका श्रम मध्यमवर्ग और उच्च वर्ग को पालने के काम आता है.यह वर्ग दुनिया का अन्न दाता है,दुनिया का खेवनहार है.
पूरी दुनिया को यह अपने श्रम से ज़िंदा रखते हैं पर कभी खुद ज़िंदाबाद नहीं होते. हाँ कभी कभी ज़िंदाबाद का नारा ज़रूर लगाते हैं. पर इनका जीवन लक्ष्य अपने परिवार और अपना पेट भरने से ज्यादा नहीं होता. 
यह दुनिया का सबसे बड़ा वर्ग है.इनकी संख्या दुनिया में सत्ता बनाने और बिगाड़ने में अहम भूमिका निभाती है. यह स्वयं नहीं जानते इस बात को पर सत्ताधीश इनकी ताक़त को जानते हैं. यह वर्ग भगवान और नियति को मानता है. इसलिए यह उस सत्ता के खेवनहार होते हैं जहाँ सत्ता धर्म के नाम पर चलती है. 
अंध विश्वास और धर्मान्धता इनमें कूट कूट कर भरी होती है. विज्ञान को मानने वाले सत्ताधीश इनको जगाने का काम करते हैं. 
यूनियन बनाते हैं. इनका अध्ययन करने वाले बुद्धिजीवी अलग अलग सत्ता सिद्धांत और राजनैतिक विचार धारा चलाते हैं. पर यह वर्ग अपने आपको जागरूक होने के बावजूद यूनियन के हवाले कर देता हैं जहाँ प्रोफेसर टाइप के लोग इनका अपने अपने हिसाब से दोहन करते हैं. जागरूकता के बावजूद यह वर्ग अपने और अपने परिवार के पेट के आगे नहीं सोचता. यह ऐसा वर्ग है जो गांधी, मार्क्स, आंबेडकर जैसे चिंतकों को धूल चटा देता है.
अपने श्रम के साथ अपनी बुद्धि का उपयोग करने वाला वर्ग है मध्यमवर्ग.यह अपनी सफ़लता को ईश्वर को समर्पित करता है. अपने सुख वैभव को ईश्वर की देन मानता है. 
अपार सपने देखने वाला यह वर्ग बिना रीढ़ का प्राणी है. सत्ताधीश के कौड़े अपनी पीढ पर सहते हुए यह मजदूर वर्ग पर धौंस जमाता है. दरअसल यह दलाल है. सत्ताधीश मध्यमवर्ग के माध्यम से मजदूर वर्ग का शोषण करता है. समय समय पर यह वर्ग आधुनिक हो जाता है.पर इसके जीवन के मूल तत्व नहीं बदलते, भगवान और दलाली. आज देखें तो कंप्यूटर, लैपटॉप, फेसबुक, व्हात्सप्प,इन्स्ताग्राम इत्यादि तकनीक का उपयोग करने वाला यह वर्ग अपने को आधुनिक और वैज्ञानिक युग का नागरिक बताने में ख़ुद की स्तुति करता है पर कंप्यूटर, लैपटॉप, फेसबुक, व्हात्सप्प, इन्स्ताग्राम इत्यादि के स्क्रीन सेवर पर भगवान की तस्वीर चिपकाकर. संस्कार,संस्कृति और परम्परा के कीचड़ में यही वर्ग कमल खिलाता है.
अपने श्रम और बुद्धि का उपयोग सत्ता के लिए करने वाला वर्ग दुनिया का सबसे छोटा समूह है. पर पूरी दुनिया को अपने इशारों पर चलाता है. यह स्वयं भगवान होता है. अपनी सत्ता के लिए यह भगवान का जन्म और पालन पोषण करता है. प्रकृति के बाद यही वर्ग है जो पूरे विश्व को नियंत्रित और संचालित करता है. 
इस वर्ग का कोई धर्म, जात, देश, ईमान, चरित्र, नैतिकता या मूल्य नहीं होता इसका एक मात्र लक्ष्य होता है सत्ता! धर्म, जात, संस्कार, संस्कृति, परम्परा, ज्ञान, विज्ञान, देश, ईमान, चरित्र, नैतिकता और मूल्य का उपयोग यह सत्ता पाने और भोगने के लिए करता है.
अपनी बुद्धि से ज्ञान अर्जन करने वाला समूह संख्या में नगण्य होता है. एक तरह से विलुप्त प्रजाति होती है यह. नए राजनैतिक सिद्धांत,विज्ञान का शोध और कला का आविष्कार यही वर्ग करता है. 
इस वर्ग का आधा हिस्सा अपनी बुद्धि का उपयोग भोग के लिए करता है सत्ता इनको पालती है और आधा मानव मुक्ति के लिए,हाँ यही वो वर्ग है जिसकी वजह से मनुष्य में इंसानियत जिंदा रहती है.

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