विवेक से ही मनुष्य की पहचान

विवेक मनुष्य की अद्भुत शक्ति वह वरदान है विवेक से ही मनुष्य की पहचान.

सुनीता कुमारी

बिहार की धरती पर सभी के जीवन बुद्धि और विवेक पर  निर्भर होता है। जैसी बुद्धि होती है वैसा ही जीवन होता है। बुद्धि मनुष्य के पास है परंतु, विवेक सभी जीवों के पास है। अपने विवेक के कारण ही एक जानवर दूसरे जानवर से अपना बचाव कर पाता है,अपनी रक्षा कर पाता है। 

हर विपरीत परिस्थिति में सही निर्णय लेकर अपनी रक्षा करता है, अपने लिए भोजन की तलाश करता है,अपने बच्चों की देखभाल करता है। सभी जीवों में जैसी बुद्धि होती है वैसा ही, विवेक होता है । 

हम मनुष्यों में भी हमारी बुद्धि और विवेक पर ही हमारा निर्भर करता है, बुद्धि और विवेक के कारण ही जीवन की सही दिशा या गलत दिशा में  गतिशील होता है।वो कहते है न कि," विपरीत परिस्थिति में विवेक से काम लेना चाहिए।"

बुद्धि और विवेक दोनों शब्द एक ही जैसे लगते हैं परंतु बुद्धि और विवेक दोनों अलग-अलग शब्द है ।बुद्धि जहां अच्छी और बुरी दोनों हो सकती है वहीं विवेक अच्छाई और बुराई में फर्क करना सिखाता है, विपरीत समय से लड़ना सिखाता है। 

लोग सच और झूठ बुद्धि वाले भी हो सकते हैं, परंतु विवेक सच और झूठ के बीच का अंतर से खिलाता है। विवेक एक ऐसा शब्द है जो बुद्धि का मंथन कर सही निर्णय लेने की क्षमता हम मनुष्य को प्रदान करता है। हमारे विवेक पर ही हमारा जीवन टिका है और हमारा जीवन हमारी अच्छी या बुरी बुद्धि एवं विवेक का ही परिणाम है।

इस धरती पर सारे जीवों निर्णय लेने की क्षमता है, अच्छे बुरे की पहचान की क्षमता है। किसी भी जानवर को जब हम पालतू पशु बनाते हैं, तो वह मालिक के प्रति वफादार होता हैं, यह उसका विवेक होता है ।वह अच्छे और बुरे पहचान लेता हैं। वह सामने वाले व्यक्ति के आंखों से ही यह समझ लेता हैं कि, वह सामने वाला उसका हितैषी है या बुरा चाहनेवाला।

एक कुत्ता हमेशा अपने मालिक का वफादार होता है एक गाय भी अपने मालिक के प्रति अपना सर झुका कर रखती है। अच्छे और बुरे का फर्क करने में कोई भी पालतू पशु देर नहीं करता हैं। परंतु हम मनुष्य में  बुद्धि तो भरी पड़ी है, हमने धरती आकाश सूरज चांद सब एक कर दिया है, परंतु हमारी बुद्धि ने हीं हमें दिग्भ्रमित कर के रख दिया है।

हमारी बुद्धि ने हमारे विवेक पर पहरा लगा रखा है? हमारे विवेक को बंदी बना कर रख लिया है? इस कारण मनुष्य जीवन में इतनी सारी विसंगतियां हैं। कहने को तो कोई भी व्यक्ति कह सकता है कि, वह संपूर्ण जीवन जी रहा है, उनके पास ऐशो आराम कि सारी चीजें हैं, सारे रिश्ते हैं। परंतु कहीं न कहीं उनके जीवन में कुछ ना कुछ कमी जरूर होती है।

ऐसा इसलिए होता है क्योंकि उनमें कहीं ना कहीं विवेक की कमी अवश्य होती है, निर्णय लेने की क्षमता का अभाव होता है, सही और गलत को का पहचान कर सही निर्णय लेना कठिन होता है। इस कारण हमारा विवेक कमजोर हो जाता है और हम गलत लोगो के शिकार हो जाते हैं।

इस धरती पर देखा जाए तो हम मनुष्यों के अलावा कहीं किसी भी जीवो में किसी तरह की कोई भी संगति नहीं है, परंतु हमारी अच्छी और बुरी बुद्धि ने हमारे विवेक को कुचल कर रखा हुआ है। इसको कई उदाहरणों से समझा जा सकता है, जैसे बहुत सारे प्रेमी प्रेमिका ऐसे हैं, जो अपनी अधूरे प्रेम संबंध से आहत होते हैं। बहुत तो ऐसे भी हैं जो  प्रेम अधूरा रहने पर जो आत्महत्या तक की बारे में सोच लेते हैं। 

इस जगह प्रेमी या प्रेमिका का विवेक कमजोर होता है। वह सामने वाले की अच्छाई और बुराई, झूठ फरेब जैसी भावना को ढंग से नहीं देख पाता है? इस कारण से वह धोखे का शिकार हो जाता है। जो लोग अपने विवेक का सही प्रयोग करते हैं, गलत प्रेम संबंध में तो फसते हैं परंतु अपने आप को समय रहते निकाल लेते हैं या फिर ऐसे फर्जी लोगों के बातों में आते ही नहीं हैं। विवेक हमें अच्छे और बुरे लोगो की पहचान करना सिखाता है।

बहुत सारे लोग वैसे भी होते हैं जो यह जानते हुए भी कि, सामने वाला व्यक्ति गलत है, फिर भी उसपर  विश्वास कर लेते है। उनका ओवर काफिडेन्स कि,उनके साथ कोई गलत नहीं करेगा" के कारण गलत इंसान का शिकार हो जाता है, धोखे का शिकार हो जाता है?, उनकी चिकनी चुपड़ी बातों में वह इस तरह से फंस जाता है कि, जब वह बर्बाद हो जाता है तब उसे आभास होता है कि, उसने उसे भी औरो की तरह छला है,औरौ की तरह उसे भी धोखा दिया है। जबकि उसे पहले से ही पता था कि, वह धोखेबाज है। हमारे समाज में बहुत सारे अभिनेता अभिनेत्री ऐसे हैं और समाज के लोग भी जाने-माने गणमान्य लोग भी है जिन्होंने कई कई शादियां की है और इनके कारण कई मासूम लोगो की जिंदगी बर्बाद हुई है। यह कमजोर विवेक का ही उदाहरण है।

चुनाव के अवसर पर है हमारा विवेक भी कमजोर रहता है । हम जानते हैं कि, फलाने नेता ने अच्छा कार्य नहीं किया? लेकिन हम सही और गलत का निर्णय हम नहीं कर पाते हैं, क्योंकि कहीं ना कहीं वह, हमारे क्षेत्रवाद जातिवाद के दायरे में आते हैं? और हमारा विवेक कमजोर पड़ जाता है, हम सही निर्णय लेने में अक्षम हो जाते हैं? जिसका फायदा नेतागण उठा लेते हैं। भारत की कमजोर राजनीति का सबसे बड़ा कारण आम जनता का विवेक कमजोर होना ही है?

आम जनता सही और गलत करने वाले जानती तो है, पर निर्णय नहीं ले पाती है? गलत लोगों को अपनी सोच से निकाल ही नहीं पाती है? उन्हें लगता है कि अगली जीत में वह जरूर कुछ ना कुछ करेगा?

या ऐसे हारे हुए नेता को भी दोबारा जीत दिला देती हैं जो अपराधी होते हैं? काम करने वाले नहीं होते हैं परंतु आम जनता का विवेक यह कहता है कि, आने वाले समय में जरूर अच्छा काम करेंगा। पिछली गलती से सीख लेंगा, परंतु ऐसा कुछ नहीं होता है? जो जैसा  प्या होता है वैसा ही होता है।

हम मनुष्य को अपने जीवन में अपने विवेक पर पकड़ बनाकर रखनी चाहिए, सही और गलत निर्णय लेने से पहले अपने विवेक का प्रयोग करना चाहिए। सोच समझकर निर्णय लेना चाहिए। 

निर्णय लेने में असमंजस में नही पड़ना चाहिए, हमेशा सही का चुनाव करना चाहिए।  हमारे विवेक पर ही हमारा परिवार, समाज, देश सब टिका है ।हमारा जीवन भी टिका है इसलिए समय-समय पर अपने विवेक का उचित प्रयोग करें। अच्छे बुरे में फर्क करें। सच्चाई और अच्छाई को अपनाकर आचरण करें। तभी आप एक अच्छे इंसान बन सकते हैं। अच्छे अच्छा जीवन जी सकते हैं

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