ख़ुश रहना एक सेहतमंद सफ़ल और अच्छी जिंदगी की कुंजी है..

  • विश्व ने अंतरराष्ट्रीय ख़ुशी दिवस 20 मार्च 2022 मनाया 
  • अन्तर्राष्ट्रीय ख़ुशी दिवस 2022 की थीम, शांत और समझदार बने रहें और दूसरों के प्रति दया का भाव रखें इस मंत्र को मनीषियों ने तात्कालिक अपनाना ज़रूरी

वैश्विक स्तरपर मनीषियों के व्यवहारिक जीवनमें ख़ुशी-गम सुखदुख, धूप-छांव, अच्छाई-बुराईहित-अहित जीवन-मृत्यु एक सिक्के के दो पहलू की तरह लागू होते हैं क्योंकि सृष्टि में हर जीव के जीवन में यह दोनों पहलू आते ही हैं। मेरा मानना है कि पूरे संसार में शायद ही कोई ऐसा अपवाद स्वरूपी मनीषी जीव होंगे जिनका जीवन चक्र के सामायिक चक्र में दोनों पहलू ना हो!!! यदि खुशी आई होगी तो दुख भी और जीवन आया हैं तो मृत्यु भी होगी यह एक दिनचर्या के समान है कि सुबह होने के बाद शाम आनी ही है। बस फरक हमारी वैचारिक सोच का होता है!

साथियों बात अगर हम इस जीवन के दोनों पहलूओं में से जो संभव है खुशी, सुख, अच्छाई, हित की करें तो यह मानवीय स्वभाव ही है कि वह सकारात्मक क्षणों में जीवन जीना पसंद करेगा जबकि गम, दुख, बुराई, अहित जो नकारात्मक क्षणों में जीवन बिताना शायद कोई पसंद नहीं करेगा! जबकि जीवन-मृत्यु चक्र में भी अधिकतम मनुषी जीवों  सकारात्मक जीवन जीने की पसंदगी का चुनाव करेंगे जो  सकारात्मक क्षणों के साथ हो। इसके विपरीत नकारात्मक क्षणों में शायद दूसरा विकराल विकल्प चुन सकते हैं। 

परंतु जांबाजी, ज़ज्बे, विपत्तियों, नकारात्मक स्थितियों से शेर की भांति लड़कर मुकाबला कर व्यवहारिक जीवन की जंग जीतने वाले जांबाजी मनीषी दोनों परिस्थितियों में अपनी जीत दर्ज कर जीवन रूपी गाड़ी को अपने अंजाम तक पहुंचाकर, इस जंग में अपने काम, अपने नाम का डंका छोड़ जाते हैं जो इतिहास में हमने देखें दर्ज हैं जो हमारी अगली पीढ़ियां भी उन्हें आदर पूर्वक याद करेंगे  बैकग्राउंड चर्चा हमने इसलिए कि क्योंकि 20 मार्च 2022 को हमने अंतरराष्ट्रीय स्तरपर ख़ुशी दिवस जोरशोर से मनाया जो उपरोक्त चर्चा का एक सकारात्मक भाग है। 

जिसपर मनीषी जीव जीवन जीना पसंद करेगा। क्योंकि खुशी ही एक सेहतमंद सफ़ल और अच्छी जिंदगी की कुंजी है। परंतु सबसे महत्वपूर्ण है खुश रहने का अपने जीवन में माहौल उत्पन्नन करना। हालांकि कुदरत का लिखा कोई मिटा नहीं सकता परंतु बहुत सारी बातें हमारे जीवन के दिनचर्या में होती है जिस पर हम खुश रहने के लिए ध्यान दे सकते हैं जिसकी प्रेरणा हम अंतरराष्ट्रीय खुशी दिवस 20 मार्च 2022 की थीम से ले सकते हैं जो शांत रहो, बुद्धिमान रहो, दयालु रहो है। 

खुशी दिवस 2022 का यह विषय खुशी प्राप्त करनेके तीन बुनियादी कारणों पर केंद्रित है: -पहला शांत रहें-हर स्थिति में शांत और स्थिर रहना संतुष्टि और खुशी की कुंजी है, क्योंकि जहां शांति और संतोष है वहां सुख अपने आप आता है। दूसरा बुद्धिमान रहें-कठिन परिस्थितियों में भी बुद्धिमानी से उठाए कदम सफलता की ओर ले जाते हैं। 

गलत दिशा में उठाया हुआ एक गलत कदम आपके आगे चलने वाले सभी कदमों को गलत दिशा में ले जाते हैं इसलिए बुद्धिमानी से सोच समझ कर सही दिशा में कदम उठाएं।तीसरा दयालु बनें-दूसरों की जरूरतों, गलतियों और त्रुटियों में दूसरों के प्रति दयालु रहें। जहां दया है वहां धर्म है और जहां धर्म है वहां परमेश्वर है और जहां परमेश्वर है वहां सुख, शांति, प्रेम और संपन्नता है।वर्तमान समय में युद्ध, हिंसा और नकारात्मकता का जो माहौल बना हुआ है उस माहौल में इन सभी बिंदुओं को ध्यान में रखना अति आवश्यक है। 

साथियों बात अगर हम खुशी की करें तो, खुशी शब्द का प्रयोग मानसिक या भावनात्मक अवस्थाओं के संदर्भ में किया जाता है,  जिसमें संतोष से लेकर तीव्र आनंद तक की सकारात्मक या सुखद भावनाएं शामिल हैं। इसका उपयोग जीवन संतुष्टि, व्यक्तिपरक कल्याण, यूडिमोनिया, उत्कर्ष और कल्याण के संदर्भ में भी किया जाता है। प्रसन्नता मानवों में पाई जाने वाली भावनाओं में सबसे सकारात्मक भावना है। इसके होने के विभिन्न कारण हो सकते हैं, अपनी इच्छाओं की पूर्ति से संतुष्ट होना। अपने दिन-रात के जीवन की गतिविधियों को अपनी इच्छाओं के अनुकूल पाना। किसी अचानक लाभ से लाभांवित होना। किसी जटिल समस्या का समाधान प्राप्त होना।

खुशी यानी हैप्पीनेस ऐसी चीज है जो हर इंसान में अलग-अलग होती है। इसके अलावा खुशी को एक तरह से परिभाषित नहीं किया जा सकता है। व्यक्ति दर व्यक्ति हैप्पीनेस की परिभाषा भी बदल जाती है। आपकी खुशी किसी दूसरे की खुशी से अलग हो सकती है।वास्तव में, हमारे जीवन में खुशी की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, और यह हमारे जीवन जीने के तरीके पर बहुत बड़ा प्रभाव डाल सकती है। हालांकि शोधकर्ताओं ने अभी तक खुशी के लिए परिभाषा या एक सहमति-आधारित रूपरेखा नहीं बनाई है।

साथियों बात अगर हम, हैप्पीनेस इंडेक्स रिपोर्ट 2021, जिसे संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित व रविवार 20 मार्च 2022 को मनाए गए अंतरराष्ट्रीय हैप्पीनेस दिवस से पहले जारी किया गया है, जिसमें वैश्विक स्तरपर देशों की सूची की रैंकिंग की जाती है, की करें तो 2021 लिस्ट में भी लगातार पांचवे साल भी फिनलैंड को दुनिया का सबसे खुशहाल देश माना गया है। जबकि दूसरे पर डेनमार्क, तीसरे पर स्विट्जरलैंड, चौथे पर आइसलैंड, पांचवें पर नीदरलैंड, छठे पर आइसलैंड, सातवें पर नॉर्वे, आठवें पर स्वीडन और नौवें पर लग्ज़मबर्ग है। 

इस खुशहाली के मामले में 150 देशों की सूची में भारत को 136वें पायदान पर रखा गया है, जो स्पष्ट तौर पर यह दिखाता है कि भारत में लोग उतना खुश नहीं हैं जितने कि अन्य देशों के लोग हैं। ध्यान दें कि 2019 में भारत को 140 वां स्थान मिला था। 

यह जानकारी ‘वर्ल्ड हैपीनेस रिपोर्ट 2021‘ में सामने आई है। रिपोर्ट में तालिबान के शासन के बाद अफगानिस्तान सबसे निचले पायदान पर है। 

दुनिया के खुशहाल और नाखुश देशों की सूची जारी हो गई है। इस सूची में पता चला है कि अफगानिस्तान  दुनिया का सबसे नाखुश देश है, यहां गौर करने वाली बात ये है कि ये स्थिति पिछले साल अगस्त में तालिबान के कब्जे के पहले थी। मतलब अफगानिस्तान के लोग पूर्ववर्ती सरकार से भी नाखुश थे! यह दावा विश्व हैप्पीनेस इंडेक्स रिपोर्ट में किया गया है। 

साथियों बात अगर हम खुश रहने का स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ने ? की करें तो, खुश रहने से मानसिक तनाव कम होता है। जो इंसान खुश रहता है उसका मानसिक तनाव काफी हद तक कम हो जाता है। 

ख़ुशी और दुःख को दिमाग कंट्रोल करता है। व्यक्ति का मानसिक स्वास्थ्य भी व्यक्ति के शरीर पर प्रभाव डालता है। इसलिए व्यक्ति को जीवन में चल रही चीजों का ध्यान रखना चाहिए। खुश रहना आपके इम्यून सिस्टम को ठीक रखने में मदद करता है। 

खुश रहने का फायदा इंसान के हार्ट पर भी पड़ता है। जो इंसान अपने जीवन में खुश रहता है उनको हार्ट अटैक होने का डर कम होता है।

अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि विश्व में अंतरराष्ट्रीय ख़ुशी दिवस 20 मार्च 2022 को मनाया गया तथा खुश रहना एक सेहतमंद सफ़ल और अच्छी जिंदगी की कुंजी है एवं अंतर्राष्ट्रीय खुशी दिवस 2022 की थीम शांत और समझदार बने रहें और दूसरों के प्रति दया का भाव रखें इस मंत्र को मनीषियों ने तात्कालिक अपनाना ज़रूरी है। 

टिप्पणियाँ