सफर जम्बूद्वीप से इंडिया तक

खंड खंड हुआ अखंड भारत?

दीप्ति डांगे 

भारत का इतिहास 65000 वर्ष पुराना माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि हमारे यहां के लोगों ने मेसोपोटामिया, ईजिप्ट, बेबिलोनिया आदि सभ्यताओं के निर्माण में योगदान दिया।

पुराविदों और आजतक की खोज से यही पता चलता है कि मानव की उत्पत्ति भारत के वितस्ता नदी की शाखा देविका नदी के तट पर हुई थी जो कश्मीर में है। इतिहासकारों की माने तो दुनिया की प्रारंभिक मानव आबादी नदियों के पास ही बसी थीं जिसमें सिंधु और सरस्वती नदी के किनारे बसी सभ्यता सबसे समृद्ध, सभ्य और बुद्धिमान थी।

प्राचीनकाल में मनुष्य आज के मनुष्य जैसा नहीं था। जलवायु परिवर्तन के चलते उसमें भी बदलाव होते गए।और सनातन धर्म दुनियाभर में अलग-अलग नामों से प्रचलित था। अरब और अफ्रीका में जहां सामी, सबाईन, ‍मुशरिक, यजीदी, अश्शूर, तुर्क, हित्ती, कुर्द, पैगन आदि इस धर्म के मानने वाले समाज थे तो रोम, रूस, चीन व यूनान के प्राचीन समाज के लोग सभी किसी न किसी धर्म का पालन करते थे। ईसाई और बाद में इस्लाम धर्म के उत्थान काल में ये सभी समाज हाशिए पर धकेल दिए गए। 

राजा भरत से लेकर सम्राट विक्रमादित्य, चन्द्रगुप्त द्वितीय, राजा भोज और हर्षवर्धन जैसे महान राजयों ने एकछत्र राज किया। इनके बाद भारत का पतन होने लगा। 

एक समय बाद में सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य ने खंड-खंड बिखरे भारत को अपने पराक्रम और चाणक्य के दूरदर्शिता, कूटनीति और राजनीति से अखंड भारत बनाया। जिसपर सम्राट अशोक तक ने राज किया। धीरे धीरे फिर से अखंड भारत टूट गया और यहां अलग अलग मान्यताएं व परंपराएं के अनुसार राज्य बन गया उन्ही परंपराएं ओर मान्यताएं मानने वाले राजाओं का शासन हो गया लेकिन उनका खान-पान, भाषा-बोली, वेशभूषा, संगीत-नृत्य, पूजापाठ, पंथ के तरीके करीब-करीब सामान ही थे। लेकिन बाहरी आक्रमकारियों के आक्रमण के बाद और विदेशी संपर्क के बाद यहां की संस्कृति बदलने लगी और पिछले 2500 सालों में भारतवर्ष पर आक्रमणकारी ने आक्रमण कर अखंड भारत को 24 भागो मे बांट दिया जो आज भारत के पड़ोसी देश कहलाते है। जैसे अफगानिस्तान, म्यांमार, श्रीलंका, नेपाल, तिब्बत, भूटान, पाकिस्तान, मालद्वीप या बांग्लादेश। यहां तक कि मलेशिया, फिलीपींस, थाईलैंड, दक्षिणी वियतनाम, कंबोडिया आदि। 1857 से 1947 तक हिंदुस्तान के 7 ओर टुकड़े होकर नए देश बन गए। 1947 में बना पाकिस्तान भारतवर्ष जो अखंड भारत का 24वां विभाजन था। 

आज जो भारत देश हैं, वो अखंड भारत का एक तिहाई भी नहीं है जिसको आज इंडिया कहा जाता है।

भारतवर्ष जम्बूद्वीप का एक भाग था और भारतवर्ष जो भारत अखंड था वो खंड खंड होकर एक छोटा सा टुकड़ा इंडिया बन गया। एटलस के अनुसार जब हम श्रीलंका या कन्याकुमारी से पूर्व व पश्चिम की ओर देखेंगे तो हिंद महासागर इंडोनेशिया व ईरान तक ही है। इन मिलन बिंदुओं के बाद ही दोनों ओर महासागर का नाम बदलता है। 

इस प्रकार से हिमालय, हिंद महासागर, आर्यान (ईरान) व इंडोनेशिया के बीच का पूरे भू-भाग को आर्यावर्त अथवा भारतवर्ष या हिंदुस्तान कहा जाता था।जिसका क्षेत्रफल 83 लाख वर्ग किमी था। लेकिन वर्तमान भारत या इंडिया का क्षेत्रफल सिर्फ 33 लाख वर्ग किमी ही रह गया। 

आज फिर कुछ बाहरी देशद्रोही ताकते धर्म जाति के नाम पर देश के ओर टुकड़े करने की कोशिश कर रही है और उनको देश के अंदरूनी देशद्रोही ताकतों का साथ मिल रहा है। जो देश को अंदर से खोखला करने की कोशिश कर रही है। 

आज हम सभी को जाति, धर्म और निजी स्वार्थ से ऊपर उठकर एक होकर देशहित मे इन देशद्रोहियो को मुंहतोड़ जवाब देना होगा और दूसरी तरफ सरकार को कठोर निर्णय लेकर अपने देश के टुकड़े होने से बचाना होगा।

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