काल देश को पुकार रहा है!

मंजुल भारद्वाज 

काल देश को पुकार रहा है!

आस्था की अंधी गुफ़ा से निकल

विवेक के चैतन्य को आलोकित करो!


काल देश को पुकार रहा है!


झूठ के मायाजाल को तोड़

सत्य की जीत करो !


काल देश को पुकार रहा है!

संविधान ने आपको देश का मालिक बनाया है

अब मालिक होने का फ़र्ज़ अदा करो!


काल देश को पुकार रहा है!


बिके हुए,खरीदे हुए,तोड़े हुए, झूठे 

राजनेताओं से देश को आज़ाद करो!


काल देश को पुकार रहा है!


देश बेचने वालों, देश को धर्मांधता में झोंकने वालों से

देश के लोकतंत्र को मुक्त करो!


काल देश को पुकार रहा है!


इतिहास से सबक लो,लम्हों की खता से

देश को सदियों की तानाशाही से बचा लो!

टिप्पणियाँ