" रामोत्सव की स्वर लहरियां मां सरयू सी मचल रहीं"

रवि मौर्य

अयोध्या। राम के बाल स्वरूप की प्राण प्रतिष्ठा के बाद से आयोजित किये जा रहे रामोत्सव में सरयू सी मचलती संगीत की स्वर लहरियों का श्रोताओं ने खूब आनंद उठाया। 

प्रथम प्रस्तुति हेतु गोरखपुर से पधारे संगीत की कई विधाओं में पारंगत विजय शंकर विश्व कर्मा ने अपनी प्रस्तुति कइला कइला हरि भजनवा कइला प्रभु की सुमिरनवा बोला जयसियाराम तथा केवट बोलल रामचंद्र से हाथ जोड़ अस बानी ए बाबू राउर मरम हम जानी, मिथिला नगरिया में फइलल खबरिया हो मिलबा भइले, जनम लिये रघुरइया अवध मा बाजे बधैया हो जैसे भक्ति भाव के भजनों से खासा प्रभाव छोड़ा।

दूसरी प्रस्तुति लता जी के लगातार 92 गीतों को 23 मिनटों में गाकर विश्व रिकॉर्ड बना कर सुर्खियों में आईं गुणी कलाकार सुनिशा श्रीवास्तव की रही, उच्च शिक्षित सुनिशा ने भजन व लोकगायन द्वारा राम जी को अपनी प्रस्तुति समर्पित की जिसमें गणपति वंदना से प्रारंभ प्रमुख भजन सीताराम जी की प्यारी राजधानी लागे, ये चमक ये दमक, आये रघुनंदन सजवा दो द्वार द्वार व मैं कहां बिठाऊं राम कुटिया छोटी सी ने श्रोताओं की खूब तालियां बटोरी।

तीसरी प्रस्तुति शिवा उपाख्य शिवांग बाल्हेकर ने दी बहुमुखी प्रतिभा के धनी बाल्हेकर ने एसी लागी लगन मीरा हो गई मगन, जहां जहां प्रभु का स्थल वहां वहां मैं जाऊं, मेरे मन में राम तन में राम, कभी कभी भगवान को भी भक्तों से काम पड़े व धोना था मन  भूल गया तू जैसे भजनों से आस्था निवेदित की।

इस अवसर पर संस्कृति विभाग उत्तर प्रदेश के कार्यक्रम अधिशासी कमलेश कुमार पाठक के संयोजन में सुनिशा श्रीवास्तव, शिवांग बाल्हेकर व विजय शंकर को श्रीराम दरबार उकेरित सुंदर स्मृति चिन्ह सामाजिक कार्यकर्ता विश्व प्रकाश रूपन ने देकर सम्मानित किया

कार्यक्रम व्यवस्थापक वैभव मिश्र, अमित कुमार ने संगतकारों गोमती प्रसाद, जितेन्द्र शर्मा, सूरज, देवलाल, अर्चना पाल, विनोद, गोपाल गोस्वामी, कीर्ति बाजपेई, अजीत उपाध्याय, दिलीप कुमार व संतलाल का भी स्वागत किया। कार्यक्रम का सुंदर संचालन विश्व प्रकाश रूपन ने किया।

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