स्थानांतरण नीति को ठेंगा दिखा रहे हैं नगर निगम के उद्यान अधीक्षक

अधूरी नीति जाए घाटे में मैं तो यही कहूँगा?

आकाश सिंह

उत्तर प्रदेश में सीएम योगी पोस्टिंग में हो रहे गेम को लेकर सख्त नजर आ रहे हैं। जीरो टॉलरेंस नीति पर एक्शन जारी है। वहीं, नगर निगम के अधिकारी पोस्टिंग के खेल में पूरी तरह से जगह नजर आ रहे हैं।  नाऊल का नगर निगम हमेशा के लिए प्लास्टिक में बना रहता है फिर बात बेकार घोटालों को लेकर हो या साफ-सफाई को लेकर।

उस पर से निकाले जाने वाला कोई नहीं है वह यहां पर प्राचीन से जमे हुए हैं। ये ऐसे अधिकारी हैं जो मजदूरों से फेविकोल की तरह चिपकाए गए हैं। फेविकोल इतना मजबूत है कि कुर्सी से मोह खत्म नहीं हो रहा है। 
 
गंगाराम गौतम नगर निगम कर उद्यान प्रबंधक पद पर रेलवे है, साथ ही उद्यान विभाग का सबसे बड़ा कार्यभार भी है। अपनी सेवा का 20 वर्ष से अधिक नगर निगम लखनऊ में ही बीता दिया। अपने प्रभाव से अपना स्थान अन्य स्थान पर नहीं देना, नगर निगम कर्मचारियों के स्थान पर बड़े पैमाने पर खेल करना है, अपने लाडलों को अपने लाडलों को भेजना है। लैपटॉप के अकाउंट से तो गौतम इस पद पर बैठे-बैठे मोटी कमाई कर रहे हैं। क्योंकि उनके भाई की फर्म भी नगर निगम में रजिस्टर्ड है और गंगाराम अपने चहेतों से भी सामान लेकर ऊपरी कमाई कर रहे हैं। मूल का कहना है कि गंगाराम गार्डन विभाग के विभाग को माली से बिल्डर भाई की फर्म या चहेते एशियाइयों की फर्म में काम कर विभाग को कई साथियों से काम मिल रहा है। ये सब नगर निगम के नाक के नीचे हो रहे हैं, पर अभी तक नगर निगम निगम तक नहीं लगी।

पार्कों के विकास की निविदा में हुआ था घपला!

इससे पहले भी गंगाराम के खिलाफ 15वें विट विभाग के माध्यम से बनी पत्रावलियों का प्रदर्शन किया गया था। लेकिन अपनी सेटिंग करके व जुगाड़ के दम पर वो नगर निगम लखनऊ में ही जाम हो गया। अब एक बार फिर गंगाराम ने अपने भाई की फर्म और अपने चहेते साथियों को काम दिलाने के लिए एक बड़ा खेल किया। 

असल में, नगर आयुक्त इंद्रजीत सिंह ने गार्डन विभाग में पार्कों के संरक्षण और गोदावरी के लिए इस मकड़ जाल से उपकरण प्राप्त किया है। लेकिन गंगाराम ने अपने भाई के फॉर्म के अलावा अन्य अभ्यर्थियों के लिए टेंडर फॉर्म की भी सेटिंग कर ली।

यह नियम है-  तीन वर्ष से अधिक समय तक एक ही नगर निकाय में रहने वाले अधिकारी व कर्मचारी के तबादले का प्रोविजन कानून में अनिवार्य रूप से रखा गया है, लेकिन इस कानून को शासन में रखना पूरी तरह से भूल गया है और इन समुदायों में एक भी शामिल है साथी नहीं हुआ. इक्का-दुक्का भी गए तो अधिकारियों ने जुगाड़ इन्वेस्टमेंट करा के लिए कहा।

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