सौदा

सुनीता कुमारी

सबके कहने पर मैं आपसे अकेले में बात करने आ तो गई पर क्षमा कीजिएगा मैं आपसे विवाह नही कर सकती।

एक उम्मीद लेकर मैं वीणा से मिलने आया था, पर पलक झपकने से  पहले  ही टूट गया। बड़ी उम्र में भी मैं अकेला हूं और अकेला ही रहना चाहता हूँ।

मेरा राष्ट्रवादी होना, समाजसेवा में संलग्न रहना मुझे मेरी कमी का एहसास भी नही कराता है। बाकी समय जो मिलता है मैं आध्यात्मिक कार्य में लगा देता हूँ। देशसेवा समाजसेवा  ही मेरी जिंदगी का मकसद है।

मगर, मेरे  परिजनों  एवं  शुभचिंतको के दबाव के कारण मैं वीणा से मिलने के लिए तैयार हो गया, शादी करने के लिए भी तैयार हो गया। 

सबों ने कहा कि अगर अच्छी लड़की तुम्हें मिलेगी तो तुम्हारा जीवन  सँवार देगी। आने वाले समय में तुम्हें जीवन साथी की आवश्यकता ज्यादा महसूस होगी, इसलिए समय रहते हुए विवाह बंधन में वापस बंध जाओ, अच्छी लड़की देख कर शादी कर लो। 

वीणा अच्छी लड़की है। सात आठ  महीने पहले उसके पति की कोरोना की वजह से मृत्यु हो गई है, उसे भी सहारे की जरूरत है और तुम्हें भी। तुम दोनों बात कर लो अगर वीणा तुम्हें अच्छी लगी तो शादी के लिए हां करना वरना ना कर देना।

मैंने भी सोचा कि चलो सब की बात मान ली जाए शादी करना ना करना तो अपने हाथ की बात है।

अगर लड़की सोच एवं विचार से मेरे जैसी होगी तो अच्छा ही रहेगा।

मैं भी आम लोगो की तरह फिर से सांसारिक -जीवन पाउगा।

बात बनी तो भी अच्छा, नही बनी तो भी मैं अपने एकांकी जीवन में मस्त हूँ।

अगर मेरा तलाक पायल के साथ न हुआ होता तो आज मैं भी खुशहाल होता।

सबके कहने में आकर मैं वीणा से मिलने के लिए तैयार हो गया।

वीणा देखने में ठीक-ठाक थी। हमारे बीच पहले इधर उधर की कुछ बातें हुई फिर बाद मुख्य बिन्दु पर आई।

एकाएक वीणा ने मुझसे कहा मैं आपसे विवाह नही कर सकती,

एकाएक मेरे मुख से निकला 

क्यों?

मेरी उम्मीद  ताश के पत्तों की तरह धराशाई हो गई थी।

मैंने खुद को संभाला और वीणा से पूछा की क्या कारण है आप मुझसे विवाह नहीं करना चाहती है?

शायद मैं आपसे उम्र में  बड़ा हूं या शायद मेरी शक्ल सूरत अच्छी नहीं है?

उसने कहा नहीं नहीं ऐसी कोई बात नहीं है 

आप में कोई कमी नहीं है ।

बस मैं विवाह नहीं करना चाहती हूं। 

मैं अपने पूर्व पति को भूल नहीं सकती हूँ ।

मैं चाह कर भी किसी और को उनका स्थान नहीं दे पाऊंगी।

आपमें भी मैं उनको ही देखूँगी। यह गलत होगा।

बड़ी मेहरबानी होगी अगर आप इस शादी से इनकार कर दे।

क्योंकि मेरे घरवाले मुझ पर दबाव बना रहे हैं कि मैं विवाह कर लूं ताकि उनका बोझ  कम हो सके।

 एक शादी के बाद फिर से, उन्हे मेरी दूसरी शादी करानी पड़ रही है। मेरे माता पिता मेरी जिम्मेदारी से मुक्त होना चाहते हैं। 

पर मैं यह शादी नहीं कर सकती। मैं उनकी यादों में बाकी  का जीवन व्यतीत करना चाहती हूँ। 

मैं आपको धोखे में नही रख सकती 

कृपया आप ही शादी से इंकार कर दें।

मैंने वीणा को समझाने के इरादे से कहा वक्त मरहम की तरह होता है,

वक्त के साथ हर गम हर तकलीफ कम हो जाती है।

जीवन अगर खुशहाल हो तो लोग वक्त के साथ भूल भी जाते है।

जीवन में आनेवाली हर तकलीफ एक पड़ाव मात्र होता है, कभी भी जिंदगी की नई शुरुआत की जा सकती है।

आपके जीवन में जो हुआ वह अत्यंत दुखद है,

परंतु उस दुख को भूलकर आगे बढ़ना जीवन है।

मैंने अपनी तरफ से वीणा को समझाने की भरसक प्रयास किया पर वीणा कुछ समझने के लिए तैयार नही हुई। 

मेरे द्वारा कही बातें  उसने अनसुनी कर दी।

वीणा ने मुझसे कहा - नही मैं लाख कोशिश कर लू मैं अपने दिवंगत पति को नही भूल सकती,

मैं अपने जीवन में किसी और को अपने पति का स्थान कभी नही दे पाउगी।

कृपया आप इस शादी से इंकार कर दे।

मैंने देखा की वीणा समझने के मूड में बिल्कुल भी नही है, इसलिए समझाना बेकार है।

मैंने वीणा से कहा आप खुद भी तो इस शादी से इंकार कर सकती है?

वीणा ने मुझसे कहा - नही मैं इस शादी से इंकार नही कर सकती, मैं क्या कहूँगी आप में कोई वैसी कमी है ही नही जिसका सहारा लेकर मैं इस शादी से मना कर संकू।

आपकी अच्छाई, आपकी सच्चाई, आपकी देशभक्ति की भावना पूरा सभ्य समाज आपको जानता है। मैं इस शादी से मना नही कर सकती है। आप आर्थिक रूप से भी संपन्न है। मैं इंकार नही कर सकती। मेरे घरवाले मुझे हाँ करने के लिए विवश कर देगे।

कृपया आप इस शादी से इंकार दे।

मैंने सोचा ज्यादा अब समझाना ठीक नहीं होगा। मुझे एकांकी नहीं जीवन बिताना है,शायद मेरी किस्मत में एकांकी जीवन ही लिखा इस लिए कुदरत भी समय समय पर मजाक करती है। वीणा इसी मजाक का हिस्सा है।

 मैंने अपने आप को समझा लिया और वीणा से कहा कि चलो ठीक है मैं ही मना कर दूंगा। मेरे ना करने में अगर आपकी खुशी छिपी है तो यही सही।

बात आई गई हो गई।

मैं भी लगभग भूल ही गया। कुछ महीने बाद फिर किसी परिचित के माध्यम से के वीणा  के माता-पिता का संदेश मुझ तक आया। वह दोबारा मुझसे मिलना चाहते थे।

मैं असमंजस में पड़ गया कि क्यों फिर से मुझसे मिलना चाहते हैं?

शादी की बात तो समाप्त ही हो चुकी है फिर ऐसा क्या हो गया जो वह मुझसे मिलना चाहते हैं?

 मैं भी तैयार हूं गया चलो कोई बात नही  देख लेते हैं कि क्या बात है?

उन लोगों से मिलने के लिए तैयार हो गया।

वीणा  के माता-पिता से जब मैं मिला तो उन्होंने कहा कि मैंने कई जगह वीणा  के लिए लड़के देखें मगर आप जैसा कोई  नहीं  मिला।

आपकी अच्छाई  है आपकी भलाई की भावना ने मुझे आप तक वापस खींचकर लाया है।

मेरे बेटी आपके हाथ में सुरक्षित और खुश रहेगी कृपया कर आप दोबारा वीणा से मिले और शादी की बात कर ले। वीणा भी आपसे मिलना चाहती है।

हमें वीणा ने सबकुछ बता दिया है, आपने स्वेच्छापूर्वक नही बल्कि वीणा के कहने पर शादी से इंकार किया था। इसके लिए हमलोग क्षमाप्रार्थी है।

मैं मन ही मन खुश हुआ कि, समय रहते वीणा ने सही चुनाव किया है, वर्ना एक शादी के बाद दूसरी शादी में शायद ही किसी लड़की को  अच्छा इंसान मिलता है, दो  तीन बच्चो के पिता या अधेर उम्र का कोई व्यक्ति मिलता है। लड़की के जीवन में सूनापन अकेलापन रह ही जाता है। मैं वीणा से मिलने के लिए तैयार हो गया। तय तिथि के दिन मैं वीणा माता पिता के साथ मेरे घर पर आई घर की छत पर मैं वीणा को लेकर  आया।

सबसे पहले मैंने ही पूछा कि क्यों इतने दिनों बाद आपको वापस मुझसे  मिलने आई?

मेरे सवालों को सुनकर वीणा ने कहा -हां मैं आपसे मिलना चाहती थी इसलिए मैंने आपतक अपने माता पिता के माध्यम से  संदेश भेजवाया।

मुझे अपनी गलती का एहसास है, मैने आपसे शादी करने से इंकार कर दिया था, मुझे ऐसा नही करना चाहिए था।

मेरे माता पिता ने बहुत सारे लड़के देखें। कई रिश्ते खुद भी चलकर मेरे पास आए

मगर आप जैसा सभ्य, सुसंस्कृत नेक इंसान नहीं मिला मिला। एक शादीशुदा लड़की की दोबारा शादी हो तो उसकी नसीब में खोटा सिक्का ही आता है। वैसे बुजुर्ग आते हैं जिनके दो-तीन बच्चे हो या उसकी बीवी इस दुनिया में ना हो।

मुझे भी इसी तरह के बहुत सारे रिश्ते को दिखाया गया पर मुझे हर जगह कुछ ना कुछ परेशानी कुछ कमी दिखी।

तब मुझे आपकी याद आई आपकी अच्छाई ने मुझे आप तक फिर से खींच ले आया।

मैं मन ही मन खुश हो गया कि चलो समय रहते हैं इसे अक्ल तो आई।

आगे वीणा  ने मुझसे कहा कि आप इतने अच्छे हैं इतने सभ्य कि मैं आराम से एक दोस्त की तरह आपके साथ जीवन बिता सकती हूं। आपके विचार मेरे विचार से मेल खाते हैं इसलिए हम दोनों एक साथ जीवन यापन कर सकते हैं।

मुझे भी जीवन में पत्नी कम एक सच्चे दोस्त की अवश्यकता ज्यादा थी जो मेरी दिन और रात दोनो की संगिनी बन सके।

मैं मन ही मन खुश हो रहा था और वीणा  मुझसे बात किए जा रही थी।

वह अपने मन की बात निडर होकर मुझसे कह रही थी। मुझे भी लगा कि एक पत्नी के रूप में एक दोस्त मिल जाए तो बुरा क्या है। पत्नी कम और दोस्त ज्यादा रहे तो जिंदगी मजे से बीत सकती हैं। आम पति-पत्नी की तरह झगड़े नहीं होंगे ना ही उसे मेरी तरफ से रूपए पैसे गहना जेवर की दिक्कत होगी मैं इतना तो कमा ही लेता हूं कि उसे सारी सुख सुविधा दे सकूं उसे खुश रख सकूं।

मैंने कहा अगर आपको ऐसा लगता है तो मैं तैयार हूं मैं आपसे विवाह बंधन में बंधकर एक दोस्त की तरह जीवन जी सकता हूं। यह मेरे लिए सौभाग्य की बात होगी 

वीणा की बातें मुझे अच्छी लग रही थी, लग रहा था कि मेरा और वीणा का विवाह हो जाएगा और हम साथ में एक अच्छा जीवन जी सकेंगे।

परंतु ?? वीणा  के अंतिम वाक्य ने मेरे पैरोंतले की  जमीन खींच ली। मेरी उम्मीद का महल फिर से पलक झपकते ही  गिर गया। आंखों के आगे अंधेरा छा गया और मैं दोबारा फिर उसी दशा में पहुंच गया जहां एक चंद महीने पहले पहुंचा था। मैंने अपने आप को संभाला, फिर वीणा से कहा

मैंने आपके कहने पर पिछली बार विवाह से  इंकार किया था और इस बार मैं खुद अपनी मर्जी से इस विवाह से इंकार  करता हूँ।

वीणा मुझसे सर्तो पर शादी करना चाहती थी ।

वीणा ने कहा - हम दोनों शादी के बाद अच्छे दोस्त की तरह रहेगे, सुख और दुःख में एक दूसरे का साथ देगे, एकदूसरे के साथ हम पूरा जीवन बितायेगे, हम दोनों आम पती-पत्नी की तरह रहेगे,  हमारे जीवन में एक दूसरे के सम्मान में कोई कमी नही रहेगी, बस हमारे बीच शारिरिक सम्बन्ध नही होगे।

आपका मुझपर कोई हक नही होगा और उसके लिए आप कभी मुझपर दबाव नहीं बनाऐगे। यह बात आपके  और हमारे  बीच  में ही रहेगी।

जिस दिन इस सीमा रेखा का आपने उल्लंघन किया उस दिन हमारा वैवाहिक सफर भी समाप्त हो जाएगा। 

वीणा आगे बोली हमारे बच्चे नही हुए तो लोग मुझपर बांझ होने का आरोप लगायेंगे

मैंने कहा यह आरोप तो लोग मुझपर भी लगायेंगे 

वीणा झट से बोली यह आरोप भी आपको अपने सर लेना होगा।

वीणा  मुझसे शादी नही सौदा करने आई है?  ये कैसा सौदा वीणा

जब आपको आपके अनुसार कोई सौदागर  नही मिला तो आपको फिर से मेरी याद आ गई। मुझे आपकी पिछली सारी बातें याद है आप अपने दिवंगत पति से बहुत प्रेम करती है, पर उस पति का क्या जिसे आप अपने जीवन में लाना चाहती है।

आपके लिए शादी स्वार्थ सिद्ध का माध्यम हो सकता है,

मेरे लिए विवाह दो शरीर के साथ-साथ दो अंतर आत्माओं का भी मिलन है।

अगर विवाह में तेरा मेरा जैसा शब्द 

या किसी तरह की कोई विवाद हो तो विवाह सफल नहीं होता है।

विवाह समर्पण का नाम है। दो लोग एक दूसरे के लिए समर्पण करते हैं तब विवाह सफल होता है।

दो लोग एक दूसरे का ख्याल रखते हैं तब विवाह सफल होता है ।

विवाह में स्त्री या पुरुष दोनों में से कोई एक भी स्वार्थी हो जाए तो विवाह असफल हो जाता है। 

मैं अपने वैवाहिक जीवन में एकबार असफल हो चुका हूँ, दूबारा नही होना चाहता।

मेरे लिए विवाह ईश्वर की आज्ञा है जिसे मैं निष्ठा से निभाना चाहता हूँ, अपने प्रेमभाव और समर्पण से अपना तथा अपनी भावी पत्नी का जीवन सुखमय बनाना चाहता हूँ।

मैं विवाह करना चाहता हूँ और आप मुझसे मेरे जीवन का "सौदा "

क्यों आप मेरी भावना को समझना  नहीं चाहती है।

शादी हो और पति पत्नी के संबंध ना हो तो ऐसे बंधन में बंधने से अच्छा एकांकी जीवन जीना सही है।

आपकी भावना को समझते हुए मैं आपसे दुबारा मिलने के लिए तैयार हो गया,

पहली बार भी आप अपने मतलब के लिए मिली और दूसरी बार भी।

आपके लिए मेरे घर के दरवाजे तबतक खुले रहेगे जबतक आप सही निर्णय नही ले लेती।

मैने हर संभव वीणा को समझाने का प्रयास किया अब वीणा की किस्मत उसके फैसले तय करेगे।

वीणा का स्वार्थ, मतलबी, दंभी निर्णय से मैं सहमत नहीं हुआ।         ...आगे ...

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