कहीं खुशी कहीं गम? अब कयासों का दौर शुरू - किशन भावनानी

  • तीनों कृषि कानूनों की वापसी- किसकी जीत किसकी हार!..
  •  निर्णय, पारदर्शिता, समय के गर्भ में!..
  • तीनों कृषि कानून वापसी का फैसला चौंकाने वाला!.. 

भारत में करीब 5 दशक पहले 1974 में रोटी फिल्म का एक गाना बहुत मशहूर हुआ था, ये तो पब्लिक है ये सब जानती है, ये तो पब्लिक है, ये चाहे तो सर पे बिठाले, चाहे फेंक दे नीचे!! साथियों 19 नवंबर 2021 को सुबह 9 बजे कुछ मामला ही अलग नजर आया!! पब्लिक को कुछ उम्मीद ही नहीं थी, पब्लिक कुछ जानती नहीं थी, पर पीएम ने अपने संबोधन में वह करके दिखाया जिसकी किसी को दूर-दूर तक उम्मीद नहीं थी!! 
तीनों कृषि कानूनों की वापसी का चौंकाने वाला निर्णय की जानकारी!! ऐसा चौंकाने वाला निर्णय जो गुरु नानकदेव के प्रकाशपर्व और देव दीपावली के पावन पर्व पर किसान भाइयों के लिए खुशियों की सौगात!! नायाब तोहफे!! की घोषणा फिर क्या! हर न्यूज़ टीवी चैनल पर धमाकेदार ब्रेकिंग न्यूज़ का दौर जो शुरू हुआ वह अभी तक जारी है. और यह बहुत आगे तक जाएगा इस पर अब कई चर्चाएं, डिबेट, वाद-विवाद, आरोप - प्रत्यारोप होंगे। इसमें किसकी हार किसकी जीत हुई यह निर्णय, इसकी पारदर्शिता तो अभी समय के गर्भ में है!! क्योंकि यह निर्णय आम जनता के लिए उतना ही चौंकाने वाला है जिसकी शायद अधिकतम लोगों को उम्मीद ही नहीं थी! 19 नवंबर जे के पीएम के संबोधन के एक एक सेकंड का हिसाब और मतलब मीडिया में निकाला गया पीएम के 18 मिनट के संबोधन के 1430 शब्दों में 41 बार स्थान, 24 बार देश, 13 बार सरकार, 8 बार कानून, पांच बार पवित्र, सत्य क्षमा वापसी एक एक बार, 60 सेकंड में देश से माफ़ी, कठिन कानूनों की वापसी, 60 सेकंड में बेबसी, अफसोस और किसानों को समझा नहीं पाने की बेबसी दिखी!! तथा कहा हमारी तपस्या में कमी रही होगी पीएम के भरे भाव में कहा दिए के प्रकाश जैसे सत्य को हम समझा नहीं पाए। परंतु पीएम ने आंदोलन शब्द का उल्लेख एक बार भी नहीं किया। साथियों पीएम के इस अचानक हुए देश के नाम संबोधन में तीनों कृषि कानूनों की वापसी और बातें सारी जनता सहित मैंने भी सुनी और हैरान रह गया!! साथियों बाद अगर हम इन तीन कानूनों की वापसी को लेकर कृषक आंदोलन की करें तो यह 26 नवंबर 2020 से शुरू हुआ था और अभी हाल ही में आंदोलन के मुख्य ने यह घोषणा की थी कि 27 नवंबर 2021 से दिल्ली के हर बॉर्डर को हम घेरेंगे, ऐसी जानकारी मीडिया, टीवी चैनलों और मीडिया में चल रही है।हालांकि इसका एक सप्ताह पूर्व ही कानून वापसी की घोषणा की गई। साथियों बात अगर हम तीनों कानूनों की वापसी की प्रक्रिया की करें तो यह ऐसे ही घोषणा से नहीं होगा इसमें जैसे कानून संसद के दोनों सदनों में पास होता है, ठीक उसी प्रकार अब इस माह के अंत में शीत सत्र में यह कानूनों को वापस लेने का बिल लाया जाएगा। संसद के दोनों सदन राज्यसभा और लोकसभा इसको पारित करेंगे और फिर राष्ट्रपति की सिग्नेचर होने के बाद ही यह कानून रद्द माना जाएगा। हालांकि केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल करके भी इसकी घोषणा कर सकती है परंतु संसद द्वारा प्राधिकृत रद्दीकरण की घोषणा की गई है। साथियों बात अगर हम सुबह 9 बजे पीएम के संबोधन की करें तो पीआईबी के अनुसार उन्होंने कहा, आज गुरु नानकदेव जी का पवित्र प्रकाश पर्व है। ये समय किसी को भी दोष देने का नहीं है। आज मैं आपको, पूरे देश को, ये बताने आया हूं कि हमने तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने का, रिपील करने का निर्णय लिया है।
इस महीने के अंत में शुरू होने जा रहे संसद सत्र में, हम इन तीनों कृषि कानूनों को रिपील करने की संवैधानिक प्रक्रिया को पूरा कर देंगे। मैं आज अपने सभी आंदोलनरत किसान साथियों से आग्रह कर रहा हूं, आज गुरु पर्व का पवित्र दिन है। अब आप अपने-अपने घर लौटें, अपने खेत में लौटें, अपने परिवार के बीच लौटें। आइए एक नई शुरूआत करते हैं। नए सिरे से आगे बढ़ते हैं। तीनों कृषि कानूनों का मकसद यह था कि देश के किसानों को, खासकर छोटे किसानों को और ताकत मिले, उन्हें अपनी उपज की सही कीमत और उपज बेचने के लिए ज्यादा से ज्यादा विकल्प मिले। ये कानून पूरी सत्‍य निष्‍ठा, किसानों के प्रति समर्पण भाव और नेक नीयत से, विशेष रूप से छोटे किसानों के कल्याण के लिए कृषि क्षेत्र के हित में व गांव-गरीब के उज्ज्वल भविष्य के लिए लाए गए थे। लेकिन इतनी पवित्र बात, पूर्ण रूप से शुद्ध, किसानों के हित की बात, हम अपने प्रयासों के बावजूद कुछ किसानों को समझा नहीं पाए, कृषि अर्थशास्त्रियों ने, वैज्ञानिकों ने, प्रगतिशील किसानों ने भी उन्हें कृषि कानूनों के महत्व को समझाने का भरपूर प्रयास किया। जीरो बजट खेती यानि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने, देश की बदलती आवश्यताओं के अनुसार क्रॉप पैटर्न को बदलने और एमएसपी को और प्रभावी तथा पारदर्शी बनाने के लिए एक कमेटी के गठन की घोषणा की। कमेटी में केंद्र सरकार, राज्य सरकारों के प्रतिनिधि होंगे, किसान होंगे, कृषि वैज्ञानिक होंगे, कृषि अर्थशास्त्री होंगे। 
राष्ट्र को संबोधित करते हुए, पीएम ने गुरु नानक जयंती के अवसर पर लोगों को बधाई दी। उन्होंने इस बात पर भी प्रसन्नता व्यक्त की कि डेढ़ साल के अंतराल के बाद करतारपुर साहिब कॉरिडोर अब फिर से खुल गया है। उन्होंने कहा, मैं आज देशवासियों से क्षमा मांगते हुए सच्‍चे मन से और पवित्र हृदय से कहना चाहता हूं कि शायद हमारी तपस्‍या में ही कोई कमी रही होगी जिसके कारण दिए के प्रकाश जैसा सत्‍य खुद किसान भाइयों को हम समझा नहीं पाए।
साथियों बात अगर हम किसान आंदोलन के मुख्य की करें तो, हालांकि मुख्य,समेत संयुक्त किसान मोर्चा ने साफ कर दिया है कि वो संसद से कृषि कानूनों की वापसी का बिल पारित होने तक आंदोलन खत्म नहीं करेंगे। किसान नेताओं ने साथ ही एमएसपी पर कानूनी गारंटी, बिजली सुधार विधेयक समेत कई अन्य मुद्दों पर भी अपनी लड़ाई जारी रखने की हुंकार भरी है। उसी तरह विपक्षी पार्टियों के भी टीवी चैनलों पर जो बयान आए वह भी जनता ने सुने हैं!! 
हम फिर कहेंगे वही रोटी फिल्म का गाना, ये तो पब्लिक है सब जानती है, ये चाहे तो सर पे बिठाए, चाहे तो फेंक दे नीचे, ये तो पब्लिक है सब जानती है!! अतः अगर हम उपरोक्त पूरे विवरण का अध्ययन कर उसका विश्लेषण करें तो हम पाएंगे कि तीनों कृषि कानूनों की वापसी में किसकी जीत किसकी हार हुई यह निर्णय और पारदर्शिता समय के गर्भ में है, तथा तीनों कृषि कानून वापसी का फैसला चौंकाने वाला है। कहीं खुशी तो कहीं गम दिखा परिणामों के लंबे कयासों का दौर लंबे समय तक शुरू रहने की संभावना है। 

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